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  • Priti Shah   02 January 2019 4:20 PM

    आज श्री चंद्रप्रभ स्वामी भगवान का जन्म कल्याणक है।

    चंद्रप्रभ स्वामी भगवान के 3 भव हुए है। पूर्व भव में प्रभु की आत्मा वैजयंत नाम के विमान में था। वहा 33 सगरोपम का आयुष्य पूर्ण करके वहा रहेल मति , श्रुत और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुवंश के कश्यप गोत्र के पूर्व देश की चंद्रपुरी नगरी के राजा महासेन की लक्ष्मणादेवी राणी की कुक्षी ए फागुन वद 5 के दिन वृश्विक राशि और अनुराधा नक्षत्र में मध्यरात्रि ए च्यवन हुआ। माता ए 14 स्वप्न देखे।

    प्रभु माता के उदर में 9 मास 7 दिन रहे। मृगशीर्ष वद 12 के दिन अनुराधा नक्षत्र में मध्यरात्रि ए प्रभु का जन्म हुआ। 56 दिककुमारीकाओ ए आकर सूती कर्म किया। 64 इन्द्रो ए मेरु पर्वत पर 1 करोड़ 60 लाख कलशों से प्रभु का जन्माभिषेक महोत्सव किया। प्रातः काल प्रभु के पिताने जन्मोत्सव मनाया। प्रभु जन्म से 4 अतिशय युक्त थे।


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