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  • Ankit Jain   20 September 2019 7:32 AM

    ऐतिहासिक तीर्थ लक्ष्मणी की महिमा अपार

    अलीराजपुर से मात्र 8 km की दुरी पर यह महान तीर्थ स्तिथ हैं ! जहाँ पर परम पूज्य तीर्थाधिपति मूलनायक श्री पद्मप्रभु भगवान की हजारों वर्ष प्राचीन दुर्लभ, भूगर्भ से निकली श्वेतवर्णी चमत्कारी प्रतिमा स्थित हैं जिसके दर्शन मात्र से मन को असीम शान्ति का अनुभव होता है

    इस तीर्थ की पुरे क्षेत्र में बड़ी महिमा है चैत्री पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा एवं मगसरसुदी 10 के दिन प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र एवं पुरे देशभर से दर्शनार्थी इस तीर्थ के दर्शन करने आते है एवं सेवा पूजा का लाभ लेते है यह तीर्थ जैन ही नहीं अपितु अन्य समाज जन में भी लोकप्रिय है इसीलिए यह जैन तीर्थ जन तीर्थ के भी नाम से जाना जाता है इस तीर्थ में समय समय पर होने वाले चमत्कार के भी कई लोग साक्षी रहे हैं पुरे भारतभर में कुछ गिनी चुनी जगह पर ही मूलनायक के रूप में श्री पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा स्थित हैं इस तीर्थ की ऐसी मान्यता है कि यहाँ से कोई भी ख़ाली हाथ नहीं जाता है

    विक्रम संवत 1427 में जैन मुनिराज जयानंद नामा के अनुसार तीर्थ लक्ष्मणीजी में 101 जिनालय एवं 2000 जैन धर्म अनुयायीयो के घर थे ! विक्रम की सोहलवी सदी में यह तीर्थ विद्यमान था एवं प्राचीन लेखों में इस तीर्थ की प्राचीनता कम से कम 2000 वर्ष से भी पूर्व के समय की हैं।

    विक्रम की 19 वीं सदी में इस तीर्थ पर यवनी आक्रमण के कारण इस तीर्थ का नाम ही शेष रह गया था। इस स्थान के आसपास कुछ समय पश्यात कृषक के खेत में से खुदाई के दौरान सर्वांग सुन्दर चौदह जिन प्रतिमाए प्राप्त हुई, जिनमे से सबसे बड़ी प्रतिमा श्री पद्मप्रभु भगवान की श्वेतवर्णी प्रतिमा थी।शास्त्रों के लेखानुसार आज भी इस तीर्थ क्षेत्र के भूगर्भ में सैकड़ो प्रतिमा है

    तत्कालीन आलीराजपुर नरेश श्री प्रतापसिंह जी के द्वारा तीर्थ निर्माणार्थ भूमि उपहार स्वरूप दान की गई एवं सभी के सहयोग से मंदिर का नवनिर्माण किया गया विक्रम संवत 1994 मगसरसुदी 10 को परमपूज्य आचार्य देव श्रीमद यतिंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के कर कमलो से नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई गई जिसमें मूलनायक के रूप में श्री पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा को एवं अन्य प्रतिमाओ को विराजित किया गया इस प्रकार इस तीर्थ की पुनः स्थापना हुई ।

    तक़रीबन 8 एकड़ मै फैले इस तीर्थ क्षेत्र में परमपूज्य दादा गुरुदेव श्री राजेंद्रसूरीश्वरजी म.सा. का मंदिर है और पावापुरी जलमंदिर की प्रतिकृति भी बनी हुई है इसके अलावा श्रीपाल और मयणा सुंदरी के जीवन प्रसंग के पूरे वृतान्त को अत्यन्त आकर्षक भिति चित्रो के द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो की दर्शनीय है ! हाल ही में लक्ष्मणी तीर्थ में आने वाले दर्शनार्थियो की सुविधा के लिये नवीन भोजनशाला एवं एयरकंडिशन धर्मशाला का निर्माण हुआ है

    लक्ष्मणी तीर्थ के समीप 100 k.m. के दायरे में तालनपुर, मोहनखेड़ा, भोपावर, अमझेरा तीर्थ स्तिथ है जिससे लक्ष्मणी तीर्थ पर आने वाले दर्शनार्थी को पंचतीर्थि का भी सहज लाभ मिलता है


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